रविवार, 6 मार्च 2022

अपनी कीमत

 



         " संगत से गुण होत है , संगत से गुण जात 

            लोग लगा जहाज में पानी में उपलात "

            यह बात यथार्थतः सही है , परन्तु उसकी गूढता को हमें समझना होगा | पक्षियों में सबसे निकृष्ट पक्षी कौआ बिलकुल हीं काला , इसे चंडाल पक्षी भी कहा जाता है | इसे अपनी दशा पर अफ़सोस हुआ और अपने को कोसने लगा | फिर उसके मन में विचार आया कि क्यों न कुछ दिन वगुले की संगत की जाय तो , हो सकता है मेरा काला पन कुछ दूर हो जाय , और वगुले की स्वेत रंग कुछ मुझे आ जाय |

                                                                                   यह सोच कर कौआ वगुले के सम्पर्क में गया और वगुले का गुण-गाण करते हुए उसे अपने संग रहने देने की याचना किया | वगुला स्वंय अपनी दशा पर व्यथित था , क्योकि उसके पास केवल स्वेत रंग हीं था | तोते के विभिन्न रंगो को देख वह खुद हीन भावना से  ग्रसित था | अतः उसने कौआ को तोता के पास जाने का सलाह दिया |

                                       कौआ को वगुले की सलाह उपयुक्त लगा और वह तोते के पास जाकर अपनी इच्छा से अवगत कराया | तोता का भी वही हाल था | तोता मोर से अपनी तुलना करता रहता और मोर के अनेक रंगो को  और आकर्षक पंख को देख , अपने पास कमी महसूस करता और दुखी रहा करता | अतः तोते ने कौआ को मोर के पास जाने का सुझाव दिया | कौआ को अब मोर के पास जाने का इच्छा हुआ | 

                                        मोर के पास जाकर उसके गुणों का बखान करने लगा , उसके अनेक रंग -विरंगी पंखो का वर्णन कर उसके महानता बताने लगा | मोर भी उसके वातों से शत-प्रतिशत  सहमत रहा | मोर कौआ से कहने लगा - कौआ भाई तुम्हारी बात तो विल्कुल सही है , परन्तु इतना गुण रखते हुए भी , मै हमेसा डरा - सहमा रहता हूँ, हर समय मेरे मन में एक डर समाया रहता है , की कब कोई मुझे पकड़ ले , और चिड़िया घर में डाल दे |

                                       परन्तु किसी कौआ को चिड़िया घर में नहीं देखा | तुम तो स्वतंत्र पक्षी हो तुम्हे किसी का डर नहीं , तुम्हे कोई पकड़ कर पिंजरे में भी नही रखेगा , तुम्हे तो वहुत खुश रहना चाहिए | तब जाकर कौआ को अपनी कीमत समझ में आया और वह खुश हो लौट गया |

          हम अपने जीवन में भी अपने गुण , क्षमता को नहीं देख दुसरे को देख दुखी होते रहते हैं | भगवान ने जो भी हमें दिया है , वह उसकी बड़ी कृपा है , हम पर | किंतु हम अपने पर संतोष नहीं रख कर , निरर्थक तुलना करते रहते है,और दुशरो को देख दुखी होते रहते हैं  | जबकी दूशरा भी खुद दुखी रहता है | ईस्वर ने जितने भी जीव बनाया है, सबका अपना महत्व है ,सबके अपने कार्य है ,सभी की अपनी विशिष्टता है | और सभी जीवो , वनस्पतियों से  मिलकर हीं हमारा -आपका ये दुनियाँ रंग-विरंगी है | इसलिए संतोष रखे और सुखी रहें |


         ( प्रस्तुति- साकेत बिहारी प्रo कर्ण )

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही शिक्षाप्रद कहानी है सर हर एक के जिवन मे यही होता है बहुत सुन्दर प्रस्तुति है

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है सर

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है सर

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