" संगत से गुण होत है , संगत से गुण जात
लोग लगा जहाज में पानी में उपलात "
यह बात यथार्थतः सही है , परन्तु उसकी गूढता को हमें समझना होगा | पक्षियों में सबसे निकृष्ट पक्षी कौआ बिलकुल हीं काला , इसे चंडाल पक्षी भी कहा जाता है | इसे अपनी दशा पर अफ़सोस हुआ और अपने को कोसने लगा | फिर उसके मन में विचार आया कि क्यों न कुछ दिन वगुले की संगत की जाय तो , हो सकता है मेरा काला पन कुछ दूर हो जाय , और वगुले की स्वेत रंग कुछ मुझे आ जाय |
यह सोच कर कौआ वगुले के सम्पर्क में गया और वगुले का गुण-गाण करते हुए उसे अपने संग रहने देने की याचना किया | वगुला स्वंय अपनी दशा पर व्यथित था , क्योकि उसके पास केवल स्वेत रंग हीं था | तोते के विभिन्न रंगो को देख वह खुद हीन भावना से ग्रसित था | अतः उसने कौआ को तोता के पास जाने का सलाह दिया |
कौआ को वगुले की सलाह उपयुक्त लगा और वह तोते के पास जाकर अपनी इच्छा से अवगत कराया | तोता का भी वही हाल था | तोता मोर से अपनी तुलना करता रहता और मोर के अनेक रंगो को और आकर्षक पंख को देख , अपने पास कमी महसूस करता और दुखी रहा करता | अतः तोते ने कौआ को मोर के पास जाने का सुझाव दिया | कौआ को अब मोर के पास जाने का इच्छा हुआ |
मोर के पास जाकर उसके गुणों का बखान करने लगा , उसके अनेक रंग -विरंगी पंखो का वर्णन कर उसके महानता बताने लगा | मोर भी उसके वातों से शत-प्रतिशत सहमत रहा | मोर कौआ से कहने लगा - कौआ भाई तुम्हारी बात तो विल्कुल सही है , परन्तु इतना गुण रखते हुए भी , मै हमेसा डरा - सहमा रहता हूँ, हर समय मेरे मन में एक डर समाया रहता है , की कब कोई मुझे पकड़ ले , और चिड़िया घर में डाल दे |
परन्तु किसी कौआ को चिड़िया घर में नहीं देखा | तुम तो स्वतंत्र पक्षी हो तुम्हे किसी का डर नहीं , तुम्हे कोई पकड़ कर पिंजरे में भी नही रखेगा , तुम्हे तो वहुत खुश रहना चाहिए | तब जाकर कौआ को अपनी कीमत समझ में आया और वह खुश हो लौट गया |
हम अपने जीवन में भी अपने गुण , क्षमता को नहीं देख दुसरे को देख दुखी होते रहते हैं | भगवान ने जो भी हमें दिया है , वह उसकी बड़ी कृपा है , हम पर | किंतु हम अपने पर संतोष नहीं रख कर , निरर्थक तुलना करते रहते है,और दुशरो को देख दुखी होते रहते हैं | जबकी दूशरा भी खुद दुखी रहता है | ईस्वर ने जितने भी जीव बनाया है, सबका अपना महत्व है ,सबके अपने कार्य है ,सभी की अपनी विशिष्टता है | और सभी जीवो , वनस्पतियों से मिलकर हीं हमारा -आपका ये दुनियाँ रंग-विरंगी है | इसलिए संतोष रखे और सुखी रहें |
( प्रस्तुति- साकेत बिहारी प्रo कर्ण )
बहुत ही शिक्षाप्रद कहानी है सर हर एक के जिवन मे यही होता है बहुत सुन्दर प्रस्तुति है
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति है सर
जवाब देंहटाएंGood
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति है सर
जवाब देंहटाएंGood motivation
जवाब देंहटाएंSuper
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंNice example
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंHmare pass jitna hai isme hi hme fully satisfied hona chahiye
जवाब देंहटाएंExactly
हटाएंBahut sundar rachna
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंBaht sunder
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंBaht sunder
जवाब देंहटाएंThanks
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