रविवार, 6 फ़रवरी 2022

गर याद रहे .......


 

                                    कुछ जादू आपके मनोरंजन करने के लिए होती है | कुछ जादू आपको अचंभित करने का पूरा माद्दा रखता है | तो कुछ जादू कई कदम आगे चलकर आपके होशों-हवाश की सीमा रेखा बता देती है | और आप निः शब्द | आपके सीने में कहीं एक बिजली जैसी कौंधेगी , जिसका असर आपके दिमाग पर स्पष्टतया पड़ेगा |

                      नतीजा आपके दिल ओ दिमाग में प्रतिस्पर्धा होगी ,और दोनों विपरीत रास्ते पर होंगी | एक कहेगा "हुआ है " | दूसरा सवाल खड़ा करेगा " कैसे " |

                किंतु यही जादू या करिश्मा कुदरत हमारे साथ करती है तो दिल ओ दिमाग दोनों दुरुस्त होते है | और दोनों गवाही भी देते है यही तो है | लेकिन जरा ठहरिये ! इसके बाद आपके पास शब्दों की कमी होगी ,आप अपनी शब्दों की बाजीगरी की तो छोरिये ठीक ठाक शब्दों के उपयोग भी नही कर पाएंगे |

                कुदरत की यह करिश्मा अगर किशी शख्सियत के रूप में हो और एक युग अपने में समेटे हुए हो और जिसका अनुसरण रास्ते भी खुद करने को मजबूर हो | तो फिर क्या कहने को बचेगा आपके पास | बात तब और पेचीदा हो जाता है जब  वही शख्स  कहे " मेरी आवाज़ ही पहचान है " और तुरंत कह  दे " नाम गुम जायेगा , चेहरा ये बदल जायेगा |"

                    तो कभी कह दे "जिन्दगी प्यार का गीत है "  और नसीहत भी दे दे " इसे हर दिल को गाना पड़ेगा |"

तो कभी जिन्दगी को गम का सागर बताने वाली हमको फिर से बता जाती हो " गम छोड़ कर मनाओ रंग रेली | "

                   ऐसे ही हजारो कहानियाँ जब आप करोड़ो लोग से सुनेंगे तो फिर आपके पास कुछ नही रहता | रहता है तो शिर्फ़ कुदरत के करिश्मे के समय में होने सौभाग्य | और इससे बढ़कर चाहिए क्या आपको ?

                लेकीन फिर से कुदरत की करिश्मा होगी और शख्सियत हमारे बीच न रहे तो फिर आंसुओ की मोती के नजरे इनायत होना लाजिमी है | "एक युग का खत्म होना " कोई पूछे इतिहाश से , तो वो दर्द की लम्बी रेखा खींचेगा की आप फिर से निः शब्द |

                                      "स्वर -कोकिला " का जाना वो भी ऐसे " छुप जाउंगी कहीं , मोहे पीत रंग दे दे "

  तो आप क्या कहियेगा |

      " बिरहा को आवाज़ देती , कभी दर्द के गोतें लगाती , कभी इश्क की रूमानियत में पहुँचा कर छोड़ देने वाली ,तो कभी सीमा पर खड़े सेना के जवानों को हिम्मत देती उस शख्सियत को आप मात्र यही कह सकते है , उन्ही की आवाज़ में -

             " तुझे जमीं पर बुलाया गया था हमारे लिए " और " जब याद आये तिहारी , वो सूरत प्यारी -प्यारी "

                                                             शत -शत नमन लता दीदी  |

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