मंगलवार, 26 अप्रैल 2022

मतवाला था वह






 मतवाला था वह ! 

रोते आँखों को पोंछते , भागा था |

बेहिसाब ,जंहा तक भाग सका ||

अपने हिसाब से बहुत दूर ,

हाथ छुराकर , पाँव बचाकर |

नजरें बचाकर , खुद को छुपाकर ||

जंहा तक भाग सकता वह ,

रोते आँखों में भागने के सपने कैसा ?

भूत पीछे लगने जैसा  |

कुछ खांसते ,कुछ हाँफते ,

कुछ हिचकते , कुछ बहकते |

भागते पैरों पर , भागा था वह |

अपनी माँ के गुस्से से डर कर ,

रोने का नाटक ,सीने में सैतानी भरकर ||

मतवाला था वह !

रोते आँखों को पोंछते ,भागा था |

कुछ कच्चे , कुछ पक्के घरों के ,

एक छोटे से गाँव के आगे पग डंडी पर |

बेहिसाब जंहा तक भाग सका वह ||

और धरती ने भी छुपा लिया था ,

भागते पैरो के उसके निशान |

हल्के पैरों के निसान ,हल्की हीं होगी ||

किंतु उसे क्या पता था , धरती की सीमा |

भागते -भागते , हाँफते -हाँफते |

कंहा तक भगा सकता था ! 

उसके नन्हे कदमों की ताकत |

गिरकर हंसना , हंसकर बैठना ||

क्या उसकी जीत है ?

मतवाला था वह !

भागने को क्षणिक भागा था |

उसे कंहा पता था ,आफत धरती पर हीं नही ,

आसमान से भी टूट सकता है !

उसकी माँ की पंहुच से पहले ,

बारूद के गोला गिर सकता है |

धरती की मासूमियत मिट चूका था ,

बारूद के संग उसके पाँव के निसान उग चूका था |

मतवाला था वह !

जंहा तक भाग सकता , भागा था वह ???


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