रविवार, 22 जनवरी 2023

चाहतो के दरवाज़े पर .........

 

चाहतो के दरवाज़े पर ......

कांपते अपने पांवों को 

ताकत का एहसास कराता 

मन के कंही किसी कोने से 

आती आवाज़ को पहचानने की कोसिस में ,

जड़ खड़ा वह देखता 

सूनी रास्तो से गुज़रता ....

थका देने वाले सफर का एहसास 

जड़ खड़ा कर देता है उसे 

चाहतो के दरवाज़े पर ........

उसके चेहरे को छूकर निकलती 

सर्र -सर्र हवा के झोंके 


दोनों हाथ से थामता दरवाज़े का खम्भा 

दिल की कंही गहराई से 

आती आवाज़ को पहचानने की कोसिस में 

जड़ खड़ा वह देखता 

मंजिल तक पंहुचाने वाली रास्ता 

बोझिल करती हुई उसकी खुद की साँसे 

दम घुटाते उसकी खुद की आंहे

जड़ खड़ा कर देता है उसे 

चाहतो के दरवाज़े पर .............

उसके गहरे पर उदास आँखों से 

गुजरती सतरंगी ख्याल 

उसे पंहुचा देने को ......

एक नई राह दिखाने को 

कांपते पांवों में ताकत भरता 

नई उर्जा से लवरेज  हवाओं को 

उसके तरफ मोरता 

खुद की हद तोड़ने की 

जिद्द उसी के आँखों में भरता 

एक निश्चय के दम से 

बहुत  दूर भाग जाने की मंशा 

चाहतो के दरवाज़े से 

दूर उसे भगा ले जाती है 

उसे उसके हद से बाहर 

केवल उसके आँखों की उदासी ....

रह जाती है -

चाहतो के दरवाज़े पर |


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