मासूमियत जो समय के साथ
दूर हो चुकी थी उससे
और ले गई थी ,अपने साथ
उसके इंसानियत को , अपने मोह पाश में
वह कोशिस करता लगातार
सींचने की मासूमियत को
ताकि पनप सके इंसानियत भी
हवाओं ने भी भरपूर साँसे भरी है
मिटटी के संग पला बढ़ा ,
ताकत पाया पानी से , अग्नि ने उसे
सिखाया है जलकर उर्जा भरना ,
वह कोशिस करता लगातार्
मासूमियत जो समय के साथ
दूर हो चुकी है उससे , जिन्दा कर सके वह ,
भीड़ का साथ भी , उसे अकेला कर देता है ,
उसके ललाट पर कई वर्षो से
एक मुखौटा पड़ा हुआ है ,
इंसान होने का गुमान उसमे भर रहा है
मुखौटे के कई बेतरतिव रंगो ने
छीन लिया है उसके चेहरे की असली रंगत
है उतावला वह , है पड़ेशान भी
किसी बच्चे की मासूमियत ने
बता दिया है ,उसके मुखौटे का रंग
दम्भ से भरा पड़ा , गुमान में डूबा हुआ
इंसान होने का घमंड उसे , उससे
दूर ले गया है , मासूमियत को
वह कोशिस करता लगातार है
एक बार पुनः सींचता है मासूमियत को
मरने की बाते तो दूर है , वह जी सके इंसानियत से
वह कोशिस करता लगातार है |

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