रविवार, 26 फ़रवरी 2023

सींचता वह मासूमियत है ......

वह कोशिस करता लगातार 

मासूमियत जो समय के साथ 

दूर हो चुकी थी उससे 

और ले गई थी ,अपने साथ 

उसके इंसानियत को , अपने मोह पाश में 

वह कोशिस करता लगातार 

सींचने की मासूमियत को 

ताकि पनप सके इंसानियत भी 

हवाओं ने भी भरपूर साँसे भरी है 

मिटटी के संग पला बढ़ा ,

ताकत पाया पानी से , अग्नि ने उसे 

सिखाया है जलकर उर्जा भरना ,

वह कोशिस करता लगातार् 

मासूमियत जो समय के साथ 

दूर हो चुकी है उससे , जिन्दा कर सके वह ,

भीड़ का साथ भी , उसे अकेला कर देता है ,

उसके ललाट पर कई वर्षो से 

एक मुखौटा पड़ा हुआ है , 

इंसान होने का गुमान उसमे भर रहा है 

मुखौटे के कई बेतरतिव रंगो ने 

छीन लिया है उसके चेहरे की असली रंगत 

है उतावला वह , है पड़ेशान भी 

किसी बच्चे की मासूमियत ने 

बता दिया है ,उसके मुखौटे का रंग 

दम्भ से भरा पड़ा , गुमान में डूबा हुआ 

इंसान होने का घमंड उसे , उससे 

दूर ले गया है , मासूमियत को 

वह कोशिस करता लगातार है 

एक बार पुनः सींचता है मासूमियत को 

मरने की बाते तो दूर है , वह जी सके इंसानियत से 

वह कोशिस करता लगातार है |

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