मंगलवार, 12 अप्रैल 2022

अनकही एहसास


कभी कभी  हम जब दो सामान्तर खड़े दीवारों या अन्य अवरोधों के बीच में खड़े होकर ध्वनी उत्पन्न करते हैं, या  

कोई मधुर गीत ऊँचे आवाज़ में गाते हैं तो , हमे हमारा ध्वनी या गीत प्रतिध्वनी के रूप में हमे वापस सुनाई देती है , 

और हम आनंद के अतिरेक में डूब जाते है | ऐसा होता है भौतिकी के सामान्य नियम के अनुसार जानते हुए भी हम 

अपने अंदर के बालमन को बाहर निकलने देते है | और तबतक निकलने देते है जबतक हम पूरी तरह से आनंदित 

नही हो जाते  और ये सब होता है एक पल की ख़ुशी के लिए  |

                            
 

                                                    कभी -कभी या यूँ कह लीजिये की अक्सर हमें खुशियों के लिए बड़े- बड़े 

जतन नही  बल्कि , छोटे -छोटे प्रयाश से हीं हम खुशियों के चादर ओढ़ सकते है , और उस चादर में अपनो व 

अपने  आस -पास के लोगो को भी उसमे शामिल कर सकते है | गर हम खुशियों को जीना चाहे  उसे अपना बनाना 

चाहे  उसे चादर की तरह फैलाना चाहे तो |


                                                 आज गुंजन बहुत हीं खुश दिख रही है , उसके ख़ुशी चेहरे पर स्पष्टता की झलक 

लिए हुए है ,आज वह अपने ऑफिस के कार्य में ज्यादा मशगुल है , उसे आज अपने बरिय अधिकारी द्वारा दिए गये 

अतिरिक्त कार्य करने में भी आनंद महसूस हो रहा है | कार्य निपटाते -निपटाते उसे बरबस अपनी पसंदीदा गीत 

गुनगुनाने का मन करने लगता है , और बीच -बीच में हल्के स्वर में गुण-गुना लेती है अपने पसंदीदा गीत | डेढ़ 

महीने पहले उसने इस ऑफिस को ज्वाइन की थी | किंतु लगातार कार्य करते -करते उसे कुछ बोरियत सी महसूस 

होने लगा था |क्योंकि उसके योग्यता के अनुसार उसे ऑफिस में कार्य नही दिया गया था | खैर उसने अपने योग्यता 

 से समझौता करके कार्य स्वीकार की थी | कारन पैसे कमाना नही बल्कि उसके पढाई-लिखाई का कुछ उपयोग हो

पाये | 

                           वैसे भी शादी के एक लम्बे समय बाद उसने ज्वाइन किया है | परिवार के जिम्मेदारियों व अपने 

एक बच्ची का अच्छे से परवरिश करते -करते उसने कब अपने आप को भुला दी थी उसे खुद भी पता नही चला | 

और कभी -कभी अपने काबिलियत  पर खीज आने लगा था | उसे खुद अपने सभी योग्यता बेकार लगने लगा था | 

तथा उसके आत्मबल भी धीरे -धीरे जवाब देने लगा था | अक्सर जब उसे अपने सहेलियों से बात होती तो अपने 

आप गुस्सा हीं आता | खुद को कोसने के सिवाय वह कर भी क्या सकती थी | उसे अपने कोलेज के दिन याद आता 

जब वह अपने सभी सहेलियों की लीडर हुआ करती थी | पढाई लिखाई से लेकर अन्य हुनर में भी | किंतु आज वह 

साधारण सी हाउस वाइफ बनकर रह गयी थी | तथा उसकी सहेलियाँ अच्छी -अच्छी पद पर कार्यरत है , अच्छे 

बेतन पैकेज पर | ऐसा नही था की उसे अच्छे पद पर अच्छे बेतन के साथ कार्य नही मिला था | किंतु उसने शादी व  

 बेटे के जन्म लेने  के बाद उसने अपने लिए एक माँ की जिम्मेदारी को प्रमुखता दी थी |

                    खैर आज वह मन ही मन बहुत सारे हिसाब -किताब भी लगा रही है ,ऑफिस का कार्य करते -करते | 

आज उसे इस नये जॉब का पहली बार बेतन जो मिलने बाला था | पुरे डेढ़ महीने बाद डेढ़ माह का बेतन उसके 

आँखों में आत्मविश्वास की झलक बढ़ाने के लिए काफी था | आज वह जल्दी -जल्दी अपना कार्य निपटाने के जिद्द  

में है , कारण उसे आज बाज़ार में कुछ खरीदारी भी करनी है | अतः वह मन ही मन बहुत सारे हिसाब -किताब 

जोड़ चुकी है | पहले वह भगवान के पूजा के वास्ते रुपैया अलग रख ली है उसके बाद अन्य खरीदारी करना है उसे |


                ऑफिस से छूटते हीं वह बाज़ार जाने के लिए ऑटो पकड़ने दौड़ पड़ती है , कुछ देर तक इंतज़ार करने 

के वाबजूद उसे कोई ऑटो नही दिखाई पड़ती है तो वह पैदल हीं बाज़ार की तरफ निकल पड़ती है | बाज़ार में घर 

के लिए मिठाई , छोटे -छोटे बच्चो के लिय चोकलेट व अन्य आवश्यक चीज बड़ी हीं जतन से खरीद रही है | आज 

उसे खरीदारी करने में भी आनंद की अनुभूति हो रही है | सारी खरीदारी हो जाने के बाद अब वह घर जाने की 

जल्दीबाजी में है | आज वह जल्दी घर पहुंचना चाहती है किंतु रास्ते की दुरी उसे कचोट रही है | किंतु इस सफर का 

अपना अलग हीं मज़ा है , अब उसके मन में ख्याल आ रहा है की , घर के लोग आज उसे विशेष नजरो से देखेगी , 

उसे बिशेष तबज्जो मिलेगी , घर के लोग उससे उसे नौकरी के अनुभव व अन्य बहुत सारी बातें करेंगी | सबके 

नजरो में आज उसके लिए विशेषता लिए हुए होगा | इन्ही सारे ख्यालो में डूबे कब उसका ऑटो उसके घर के आगे 

लगा उसे पता भी नही चला |     

                                                अब ऑटो से उतरते उसके पाँव ख़ुशी के मारे काँप रहे है | आँखों में नन्हे -नन्हे 

खुशियों के मोती तैरने लगी है | घर पहुँच कर लगभग उछलते हुए बड़ो को प्रणाम कर आशीर्वाद मांगते हुए अपने 

बेतन की बात बताती है , और प्रतिक्रिया के इंतज़ार करने लगती है , किंतु यह क्या उसने जो मन ही मन रास्ते में  

ख्यालो में जो कल्पना किया था , वैसी एक भी प्रतिक्रिया उसे दिखाई नही दे रही है | कहते है ख़ुशी के वक्त का 

तकलीफ कुछ ज्यादा खतरनाक होती है | अब उसके चेहरे पर भी शुन्यता के भाव आने लगी है | अंदर हीं अंदर 

 वह घुटन सी महसूस करते हुए , घर के छोटे -छोटे बच्चो के बीच चोकलेट लेकर पंहुच जाती है फिर क्या उसके 

मस्ती और बच्चो की धमा चौकरी | अब उसे आनंद आने लगा है | वह कुछ , बहुत कुछ भूल चुकी थी , उसे भूलना 

भी चाहिए , खुशियों के के साथी कोई भी हो , पूरी तरह से वह मगन होना चाहती है | पूरी तरह से वह आज काऔर 

अभी का पल वह जी लेना चाहती है | बच्चो से छूटते हीं वह अपने पति को फ़ोन से पूछती है आपको क्या चाहिए |

 उसके कुछ समय बाद वह रात के खाना बनाने के कामो में व्यस्त हो जाती है |

                                                              

                                                                          ******





                                                      

                                            


13 टिप्‍पणियां: